Kal Aur Aaj

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Vo Bhii Kyaa Log The Aasaan Thii Raahe.N Jin Kii
Band Aa.Nkhe.N Kiye Ik Simt Chale Jaate The
Aql-O-Dil Khvaab-O-Haqiiqat Kii Na Uljhan Na Khalish
Mukhtalif Jalve Nigaaho.N Ko Na Bahalaate The


Ishq Saadaa Bhii Thaa Bekhud Bhii Junuu.N_Peshaa Bhii
Husn Ko Apanii Adaao.N Pe Hijaab Aataa Thaa
Phuul Khilate The To Phuulo.N Me.N Nashaa Hotaa Thaa
Raat Dhalatii Thii To Shiisho.N Pe Shabaab Aataa Thaa


Chaa.Ndanii Kaif_Asar Ruuh_Afzaa Hotii Thii
Abr Aataa Thaa To Bad_Mast Bhii Ho Jaate The
Din Me.N Shorish Bhii Huaa Karatii Thii Hangaame Bhii
Raat Kii God Me.N Muu.Nh Dhaa.Np Ke So Jaate The


Narm Rau Vaqt Ke Dhaare Pe Safiine The Ravaa.N
Saahil-O-Bahr Ke Aa_Iin Na Badalate The Kabhii
Naakhudaao.N Pe Bharosaa Thaa Muqaddar Pe Yaqii.N
Chaadar-E-Aab Se Tuufaan Na Ubalate The Kabhii


Ham Ke Tuufaano.N Ke Paale Bhii Sataaye Bhii Hai.N
Barq-O-Baaraa.N Me.N Vo Hii Shame.N Jalaaye.N Kaise
Ye Jo Aatish_Kadaa Duniyaa Me.N Bha.Dak Utthaa Hai
Aa.Nsuo.N Se Use Har Baar Bujhaaye.N Kaise


Kar Diyaa Barq-O-Bukhaaraat Ne Mahashar Barpaa
Apane Daftar Me.N Litaafat Ke Sivaa Kuchh Bhii Nahii.N
Ghir Gaye Vaqt Kii Beraham Kashaakash Me.N Magar
Paas Tahaziib Kii Daulat Ke Sivaa Kuchh Bhii Nahii.N


Ye Andheraa Ye Talaatum Ye Havaao.N Kaa Kharosh
Is Me.N Taaro.N Kii Subuk Narm Ziyaa Kyaa Karatii
Talkhii-E-Ziist Se Ka.Davaa Huaa Aashiq Kaa Mizaaj
Nigaah-E-Yaar Kii Maasuum Adaa Kyaa Karatii


Safar Aasaan Thaa To Manzil Bhii Ba.Dii Raushan Thii
Aaj Kis Darjaa Pur_Asaraar Hai.N Raahe.N Apanii
Kitanii Parachhaa_Iyaa.N Aatii Hai.N Tajallii Ban Kar
Kitane Jalvo.N Se Ulajhatii Hai.N Nigaahe.N Apanii



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एक अंधी लडकी थी । उसे उसके एक दोस्त के अलावा सबने ठुकरा दिया था । पर वो दोस्त उससे बहुत प्यार करता था । लडकी रोज़ उससे ये कहती कि अगर वो उसे देख पाती तो उसी से शादी करती । एक दिन किसी ने उस लडकी को अपने आंखे दे दीं । जब वो देख सकने लगी तो उसने देखा की उसका वह दोस्त अंधा था । दोस्त ने उससे पूछा की क्या अब वो उससे शादी करेगी ? लडकी ने साफ़ इनकार कर दिया । इस पर उसका दोस्त मुस्कुराया और चुप चाप उसे एक कागज़ देकर चला गया । उसपर लिखा था - "मेरी आखों का ख्याल रखना"
"बड़े लंबे होते हैं जिंदगी के ये रास्ते
दो कदम तुम चलो, दो कदम हम चलेंगे
बाद में टैक्सी कर लेंगे!!!"

"स्टूडेंट के दर्द को यूनिवर्सिटी क्या जाने
कॉलेज के रिवाजों को पेरेंट्स क्या जाने
होती है कितनी तकलीफ एक पेपर लिखने में
वो पेपर चैक करने वाले क्या जाने!!!"

"न इश्क कर मेरे यार
ये लड़कियाँ बहुत सताती हैं
न करना इन पर ऐतबार
यह खर्चा बहुत करवाती हैं
रिचार्ज तुम करवा के देते हो
और नंबर मेरा लगाती हैं!!"


"आसमान में काली घटा छाई है
आज फिर गर्लफ्रेंड से मार खाई है
मगर मेरी गलती नहीं है दोस्तों
पड़ोसवाली लड़की आज मिनी स्कर्ट पहनकर आई है…"


"वाह गालिब तूने क्या शेर मारा है
वाह गालिब तूने क्या शेर मारा है
अरे यार! देख जरा शेरनी कितना रो रही है!! "


आपकी याद में मैने कलम उठाई
लिया कागज, तस्वीर आपकी बनाई,
सोचा था दिल से लगा के रखूँगा उस तस्वीर को,
पर वो तो बच्चों को डराने के काम आई. :) :) :)

लोग इश्क करते हैं, बड़े शोर के साथ
हमने भी किया, बड़े जोर के साथ
मगर अब करेंगे, थोडा़ गौर के साथ
क्योंकि कल उसको देखा, किसी ओर के साथ!

वो आज भी हमें देखकर मुस्कुराते हैं
वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं
ये तो उनके बच्चे ही कमीने हैं
जो हमें मामा-मामा कहकर बुलाते हैं!

नई-नई शादी थी
नया-नया था जमाना
दुल्हा बेचैन था
सुनने को गाना
दुल्हन ने शुरू किया गाना
भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना…
"खुद को कर बुलंद इतना कि
हिमालय की चोटी पर जा पहुँचे
और खुदा तुमसे पूछे
अबे गधे, अब उतरेगा कैसे?"

"फिजाओं में तुम हो
घटाओं में तुम हो
हवाओं में तुम हो
बहारों में तुम हो
धूप में तुम हो
छाँव में तुम हो
अब तुम ही बताओ मेरी जान
क्या तुम किसी भूत से कम हो!!"

"हम आपको देखना चाहते हैं
आप से मिलना चाहते हैं
पर लोग बहुत जालिम हैं
मुझे आपसे मिलने नहीं देते
कहते हैं कि जू बंद है, कल आना...." :)) :)) :)) :))

"हम रात की तन्हाइयों से आपका जिक्र किया करते हैं
चाँद से आपकी बातें किया करते हैं
ना आओ हमारे ख्वाबों में यूँ तुम
हम भूत से बेहद डरा करते हैं!"
"खुशबू ने फूल को एक अहसास बनाया
फूल ने बाग को कुछ खास बनाया
चाहत ने मोहब्बत को एक प्यास बनाया
और इस मोहब्बत ने एक और देवदास बनाया!"

"कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
तुम होती तो यह कहती
तुम होती तो वो कहती
इस बात पर हँसती
उस बात पर नाराज होती
शुक्र है तुम नहीं हो!"

"हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे
लफ्ज कागज पर उतर जादूगरी करने लगे
कामयाबी जिसने पाई उनके घर बस गए
जिनके दिल टूटे वो आशिक शायरी करने लगे!"

"वो हमें देख रहे थे तिरछी नजरों से, हमारे होश खो गए
वो हमें देख रहे थे तिरछी नजरों से, हमारे होश खो गए
जब हमें पता चला की उनकी नजरे ही तिरछी है
तो हम बेहोश हो गए!"
नमस्कार दोस्तों, ये खुश्बुओ का आलम, ये जिंदगी की मस्ती, फिर छोड़ आये रहबर हम अपना दिल कहीं..... जी हाँ हमारा मस्ती क्लब साहिल है तूफानों के लिये, आईना है अरमानो के लिये, महफिल है अंजानो के लिये और ख्वाईश है आप जैसे दोस्तो को पाने के लिये | ये क्लब उन सभी लोगो के लिये है जो अपनी जिंदगी से प्यार करते है और जिनका मकसद अपनी व दुसरो की ज़िंदगी मे मस्ती, प्यार् और दोस्ती के रंग भरना है..... सड़क किनारे किसी पतली गली में, आड़ी-तिरछी बनी हुई है॰॰॰ जिन्दगी , प्यार खुशी मंजील से दूर ले जाती “मजबूरी”, शायद किसी खूंटे से बंधी हुई है॰॰॰ जिन्दगी , सिगरेट के छल्ले और मदिरा की बोतलें, अपनी मस्ती में मस्त बेफिक्र है॰॰॰ जिन्दगी , खुले गगन में सितारों के बीच उड़ता पंछी बोला, आगे बढ़ते रहने का नाम है॰॰॰ जिन्दगी. जी लो जी भर के अपनी ज़िंदगी, कर लो थोड़ा मज़ा और मस्ती, किसे पता ये लम्हे और ये दोस्त कल फिर मिले या नही ....
हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.

मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
उसका पेट्रोल ख़त्म था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.

मुझे नर्सों ने उठाया,
डॉक्टरोंमें में कहा दम था .
मुझे जिस बेड पर लेटाया,
उसके नीचे बम था.

मुझे तो बम से उड़ाया,
गोली में कहाँ दम था.
और मुझे सड़क में दफनाया,
क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
अरे हमें तो अपनों ने लूटा,गैरों में कहाँ दम था.मेरी हड्डी वहाँ टूटी,जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,उसका पेट्रोल ख़त्म था.मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,क्योंकि उसका किराया कम था.मुझे डॉक्टरों ने उठाया,नर्सों में कहाँ दम था.मुझे जिस बेड पर लेटाया,उसके नीचे बम था.मुझे तो बम से उड़ाया,गोली में कहाँ दम था.और मुझे सड़क में दफनाया,क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
अरे हमें तो अपनों ने लूटा,गैरों में कहाँ दम था.मेरी हड्डी वहाँ टूटी,जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,उसका पेट्रोल ख़त्म था.मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,क्योंकि उसका किराया कम था.मुझे डॉक्टरों ने उठाया,नर्सों में कहाँ दम था.मुझे जिस बेड पर लेटाया,उसके नीचे बम था.मुझे तो बम से उड़ाया,गोली में कहाँ दम था.और मुझे सड़क में दफनाया,क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
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